वैश्विक समुद्री व्यापार में हलचल के बीच होर्मुज़ स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने लगी है। इसका असर पूरी दुनिया की सप्लाई चेन पर पड़ा है, लेकिन इसी संकट के बीच भारत के लिए एक बड़ा अवसर उभरता नजर आ रहा है।
विझिंजम पोर्ट पर बढ़ा ट्रैफिक

विझिंजम पोर्ट अचानक वैश्विक शिपिंग कंपनियों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है। यहां जहाजों की आवाजाही में तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, करीब 100 जहाज बर्थिंग के लिए कतार में हैं या अनुमति का इंतजार कर रहे हैं, जो इस पोर्ट की बढ़ती अहमियत को दर्शाता है।
शशि थरूर ने बताया बड़ा बदलाव
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने इस स्थिति को भारत के लिए ‘आपदा में अवसर’ बताया है।
उनका कहना है कि वैश्विक शिपिंग कंपनियां अब सुरक्षित और वैकल्पिक मार्ग तलाश रही हैं, जिससे विझिंजम पोर्ट एक भरोसेमंद ट्रांसशिपमेंट हब के रूप में उभर रहा है।
रणनीतिक लोकेशन का फायदा
विझिंजम पोर्ट की सबसे बड़ी खासियत इसकी लोकेशन है। यह अंतरराष्ट्रीय शिपिंग रूट से महज 10 नॉटिकल मील की दूरी पर स्थित है।
इस वजह से जहाजों को मुंबई या मुंद्रा जैसे बंदरगाहों तक लंबा रास्ता तय नहीं करना पड़ता, जिससे समय और ईंधन दोनों की बचत होती है।
क्षमता की चुनौती और विस्तार योजना
हालांकि, बढ़ती मांग के बावजूद पोर्ट की मौजूदा क्षमता सीमित है।
अभी 800 मीटर लंबे कंटेनर बर्थ पर एक समय में केवल दो बड़े जहाज ही खड़े हो सकते हैं।
इस चुनौती को देखते हुए Adani Vizhinjam Port Private Limited द्वारा करीब 10,000 करोड़ रुपये के निवेश से विस्तार कार्य जारी है।
2027 तक बर्थ की लंबाई 1,200 मीटर और 2028 तक 2,000 मीटर करने की योजना है, जिससे एक साथ 5 बड़े जहाजों को संभाला जा सकेगा।
भारत की बढ़ती समुद्री ताकत
विझिंजम पोर्ट भारत का पहला डीप-वॉटर ट्रांसशिपमेंट हब माना जाता है।
हाल ही में इस पोर्ट ने 10 लाख TEU का आंकड़ा पार किया और मार्च 2026 में 61 जहाजों को संभालकर नया रिकॉर्ड बनाया।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पोर्ट भविष्य में कोलंबो और सिंगापुर जैसे बड़े हब को चुनौती दे सकता है।
निष्कर्ष
वैश्विक संकट के बीच विझिंजम पोर्ट का उभार यह दिखाता है कि सही रणनीति और इंफ्रास्ट्रक्चर किसी भी चुनौती को अवसर में बदल सकते हैं। आने वाले समय में यह पोर्ट भारत की आर्थिक और समुद्री ताकत को नई ऊंचाई पर ले जा सकता है।
