नई दिल्ली: महिला आरक्षण बिल लोकसभा में पास न होने के बाद प्रधानमंत्री Narendra Modi ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए भावुक और कड़ा संदेश दिया। उन्होंने देश की महिलाओं से माफी मांगते हुए कहा कि यह हार नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है और नारी शक्ति की लड़ाई जारी रहेगी।
महिलाओं से मांगी माफी

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि सरकार ने पूरी ईमानदारी से महिलाओं को 33% आरक्षण दिलाने का प्रयास किया, लेकिन राजनीतिक कारणों से यह संभव नहीं हो सका।
उन्होंने देश की माताओं और बहनों से क्षमा मांगते हुए कहा कि उनका संघर्ष महिलाओं के अधिकारों के लिए जारी रहेगा।
विपक्ष पर तीखा हमला
पीएम मोदी ने कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, टीएमसी और डीएमके पर आरोप लगाया कि उन्होंने संसद में इस बिल को रोककर महिलाओं के अधिकारों की “भ्रूण हत्या” की है।
उन्होंने कहा कि बिल गिरने के बाद विपक्ष का जश्न मनाना देश की महिलाओं के आत्मसम्मान पर चोट है।
“महिलाओं का आक्रोश झेलना होगा”
प्रधानमंत्री ने साफ संकेत दिया कि यह मुद्दा आने वाले चुनावों में बड़ा राजनीतिक विषय बनेगा।
उन्होंने कहा कि 21वीं सदी की नारी अब जागरूक है और अपने अधिकारों के खिलाफ जाने वालों को जवाब देगी।
उनके अनुसार, महिला आरक्षण का विरोध करने वालों को जनता के गुस्से का सामना करना पड़ेगा।
40 साल का इंतजार और 2029 का लक्ष्य
पीएम मोदी ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम 40 साल से लंबित महिलाओं के अधिकारों को 2029 से लागू करने का प्रयास था।
उन्होंने इसे महिलाओं को समान भागीदारी देने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया।
भाषण की 10 बड़ी बातें
- महिलाओं से सार्वजनिक माफी
- बिल को ‘पवित्र प्रयास’ बताया
- विपक्ष पर स्वार्थी राजनीति का आरोप
- “नारी शक्ति का अपमान” कहा
- 2029 से आरक्षण लागू करने की बात
- विपक्ष पर ‘भ्रूण हत्या’ का आरोप
- कांग्रेस को एंटी-रिफॉर्म बताया
- परिसीमन पर भ्रम फैलाने का आरोप
- “दलहित बनाम देशहित” का मुद्दा उठाया
- महिला मुद्दा चुनावों में बड़ा बनेगा
