नदी की प्राकृतिक धारा से छेड़छाड़ का आरोप
मुरादाबाद में रामगंगा नदी की मुख्य धारा को कथित रूप से मोड़ने के प्रयास को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। क्षेत्र के ग्रामीणों और किसानों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर आरोप लगाया है कि कुछ प्रभावशाली लोगों द्वारा नदी की प्राकृतिक धारा बदलने की कोशिश की जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि ऐसा हुआ तो लगभग 50 गांवों में बाढ़, कटान और सिंचाई संकट जैसी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
भूमाफियाओं पर लगाए गंभीर आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि रामगंगा के डूब क्षेत्र में पिछले करीब दो दशकों से कुछ लोगों द्वारा अवैध रूप से भूमि कब्जाने का काम किया जा रहा है। उनका कहना है कि जहां निर्माण कार्य नहीं होना चाहिए था, वहां भी विभिन्न माध्यमों से निर्माण कराए गए हैं। अब नदी की मुख्य धारा को काटकर दूसरी दिशा में मोड़ने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे पूरे क्षेत्र का भूगोल और जल प्रवाह प्रभावित हो सकता है।
किसानों ने जताई सिंचाई संकट की चिंता
प्रदर्शन कर रहे किसानों के अनुसार नदी की धारा में बदलाव होने से खेतों तक पानी पहुंचने में समस्या उत्पन्न हो जाएगी। इससे हजारों बीघा कृषि भूमि प्रभावित हो सकती है। किसानों का कहना है कि पहले से ही मौसम की मार झेल रहे कृषि क्षेत्र पर इसका सीधा असर पड़ेगा और फसलों का उत्पादन प्रभावित होगा।
इन गांवों से होकर बहती है रामगंगा
ज्ञापन में ग्रामीणों ने बताया कि वर्तमान में रामगंगा नदी ग्राम रुस्तमपुर बहादुर, ऐतमाली, नाजरपुर, लोदीपुर वासु और वीरपुर वरियार के रास्ते होकर कोसी नदी में मिलती है। उनका कहना है कि वर्षों से नदी का प्राकृतिक बहाव इसी मार्ग से रहा है। ऐसे में किसी भी प्रकार का कृत्रिम बदलाव क्षेत्र के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।
बाढ़ और कटान का बढ़ सकता है खतरा
ग्रामीणों का कहना है कि यदि नदी की धारा सिकंदरपुर पट्टी की ओर मोड़ी गई तो आसपास के करीब 50 गांव प्रभावित होंगे। इससे फसलें नष्ट हो सकती हैं, पशुधन को नुकसान पहुंच सकता है और सड़कें तथा अन्य सरकारी निर्माण कटान और जलभराव की चपेट में आ सकते हैं। स्थानीय लोगों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि नदी के प्राकृतिक स्वरूप के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ स्वीकार नहीं की जाएगी।
आंदोलन की चेतावनी
ज्ञापन पर कई ग्राम प्रधानों और ग्रामीणों के हस्ताक्षर हैं। क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि किसी द्वारा अवैध रूप से नदी की धारा मोड़ने का प्रयास किया गया है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे बड़े जन आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।
