क्या राष्ट्रपति पद से हटेंगे डोनाल्ड ट्रंप? 25वें संशोधन पर बढ़ी चर्चा
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और विवादित बयानों के बीच Donald Trump को लेकर अमेरिकी राजनीति में नई बहस छिड़ गई है। अमेरिका में कुछ नेताओं ने राष्ट्रपति को हटाने के लिए Twenty-fifth Amendment to the United States Constitution लागू करने की मांग उठाई है। अगर यह लागू होता है, तो उपराष्ट्रपति JD Vance को कार्यवाहक राष्ट्रपति की जिम्मेदारी मिल सकती है। 🇺🇸
विवादित बयान से बढ़ा विवाद

रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप ने सोशल मीडिया पर ईरान को लेकर कड़े और विवादित शब्दों का इस्तेमाल किया। इस पोस्ट के बाद विपक्षी नेताओं और कुछ विश्लेषकों ने राष्ट्रपति के व्यवहार पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि इस तरह की भाषा और अचानक बदलती रणनीति वैश्विक तनाव के समय चिंता का विषय है।
25वां संशोधन क्या है?
अमेरिकी संविधान का 25वां संशोधन 1967 में लागू किया गया था। इसका उद्देश्य ऐसी स्थिति में सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया तय करना है, जब राष्ट्रपति अपने कर्तव्यों का पालन करने में सक्षम न हों। इसमें चार प्रमुख धाराएं हैं, जिनमें धारा-4 सबसे ज्यादा चर्चा में है।
- धारा 1: राष्ट्रपति पद खाली होने पर उपराष्ट्रपति पूर्ण राष्ट्रपति बन जाता है।
- धारा 2: उपराष्ट्रपति का पद खाली होने पर नया नाम प्रस्तावित किया जाता है।
- धारा 3: राष्ट्रपति अस्थायी रूप से सत्ता सौंप सकता है।
- धारा 4: उपराष्ट्रपति और कैबिनेट के बहुमत द्वारा राष्ट्रपति को अक्षम घोषित किया जा सकता है।
धारा-4 पर क्यों बढ़ी मांग?
कुछ अमेरिकी नेताओं ने कहा है कि राष्ट्रपति की हालिया बयानबाजी और नीति बदलाव चिंता का विषय हैं। उनका मानना है कि इस स्थिति में उपराष्ट्रपति और कैबिनेट को संविधान के तहत विकल्पों पर विचार करना चाहिए। हालांकि, अभी तक इस दिशा में कोई आधिकारिक कदम नहीं उठाया गया है।
क्या बन सकते हैं जेडी वांस कार्यवाहक राष्ट्रपति?
अगर 25वें संशोधन की धारा-4 लागू होती है और कैबिनेट बहुमत से सहमत होती है, तो उपराष्ट्रपति जेडी वांस को तुरंत कार्यवाहक राष्ट्रपति बनाया जा सकता है। हालांकि इसके बाद कांग्रेस में दो-तिहाई बहुमत से निर्णय की पुष्टि करनी होती है, जो राजनीतिक रूप से जटिल प्रक्रिया है।
राजनीतिक असर
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बहस से अमेरिकी राजनीति में तनाव बढ़ सकता है। यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी असर डाल सकता है, खासकर उस समय जब मध्य पूर्व में हालात पहले से संवेदनशील बने हुए हैं।