प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नॉर्वे दौरे का मंगलवार को बेहद अहम दिन है। पीएम मोदी ओस्लो में आयोजित तीसरे इंडिया-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इस सम्मेलन में नॉर्वे, डेनमार्क, फिनलैंड, आइसलैंड और स्वीडन के प्रधानमंत्री शामिल होंगे। माना जा रहा है कि यह समिट भारत और नॉर्डिक देशों के बीच आर्थिक, तकनीकी और रणनीतिक संबंधों को नई दिशा दे सकती है।
यह प्रधानमंत्री मोदी की पहली नॉर्वे यात्रा है और इसे भारत-नॉर्डिक रिश्तों के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत लगातार यूरोप के इन विकसित देशों के साथ व्यापार, हरित ऊर्जा, डिजिटल तकनीक और निवेश के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर जोर दे रहा है।
क्यों खास है इंडिया-नॉर्डिक समिट?
नॉर्डिक देश दुनिया में तकनीक, इनोवेशन, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी माने जाते हैं। भारत इन देशों की तकनीकी विशेषज्ञता और निवेश क्षमता को अपने विकास कार्यक्रमों से जोड़ना चाहता है। यही वजह है कि इस बार के समिट में ग्रीन ट्रांजिशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ब्लू इकॉनमी, सप्लाई चेन और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे मुद्दों पर विशेष चर्चा होने की संभावना है।
भारत और नॉर्डिक देशों के बीच व्यापार भी लगातार बढ़ रहा है। दोनों पक्षों के बीच वस्तुओं और सेवाओं का द्विपक्षीय व्यापार करीब 19 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है। वर्तमान में लगभग 700 नॉर्डिक कंपनियां भारत में सक्रिय हैं, जबकि करीब 150 भारतीय कंपनियां नॉर्डिक देशों में कारोबार कर रही हैं।
कई देशों के नेताओं से अलग-अलग मुलाकात
प्रधानमंत्री मोदी आज आइसलैंड, फिनलैंड और डेनमार्क के प्रधानमंत्रियों के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगे। इन बैठकों में रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, ग्रीन हाइड्रोजन और निवेश जैसे अहम विषयों पर चर्चा हो सकती है।
इसके अलावा भारतीय छात्रों, स्टार्टअप सेक्टर और टेक्नोलॉजी एक्सचेंज को लेकर भी महत्वपूर्ण फैसले लिए जाने की उम्मीद है।
वैश्विक मुद्दों पर भी होगी चर्चा
इंडिया-नॉर्डिक समिट में वैश्विक आर्थिक चुनौतियां, यूक्रेन संकट, आर्कटिक क्षेत्र में सहयोग और सप्लाई चेन को मजबूत बनाने जैसे अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी बातचीत हो सकती है। माना जा रहा है कि समिट के बाद सभी देशों की ओर से संयुक्त बयान जारी किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते वैश्विक हालात में भारत अपने भरोसेमंद साझेदार देशों का दायरा बढ़ा रहा है और नॉर्डिक देश भारत को तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और बड़े बाजार के रूप में देख रहे हैं।
