बुधवार को राष्ट्रीय दलित पिछड़ा वर्ग की ओर से सिविल लाइन स्थित IMA Hall में एक प्रेस वार्ता आयोजित की गई।
प्रेस वार्ता में संगठन के प्रदेश अध्यक्ष Rohit Valmiki ने सफाई कर्मचारियों से जुड़े गंभीर मुद्दों को उठाते हुए सरकार और राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग से कार्रवाई की मांग की।
“भर्ती दूसरे की, काम वाल्मीकि समाज से”
प्रदेश अध्यक्ष रोहित वाल्मीकि ने आरोप लगाया कि सफाई कर्मचारी के पदों पर भर्ती हुए कई लोग स्वयं सफाई कार्य नहीं कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसे कर्मचारी वाल्मीकि समाज के जरूरतमंद लोगों से सफाई का काम करा रहे हैं और बदले में उन्हें केवल चार से पांच हजार रुपये प्रतिमाह दिए जा रहे हैं।
जबकि सरकारी कर्मचारियों को इसी पद पर 50 से 60 हजार रुपये तक वेतन मिल रहा है।
“यह अधिकारों का हनन”
संगठन ने इसे वाल्मीकि समाज के साथ अन्याय और सफाई कर्मचारियों के अधिकारों का हनन बताया।
रोहित वाल्मीकि ने कहा कि जो लोग सरकारी नौकरी में भर्ती हुए हैं, उन्हें स्वयं सफाई कार्य करना चाहिए। किसी अन्य व्यक्ति से काम करवाना नियमों के खिलाफ है।
उन्होंने कहा कि इससे जरूरतमंद लोगों का आर्थिक और सामाजिक शोषण हो रहा है।
राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग से जांच की मांग
प्रेस वार्ता में बताया गया कि इस पूरे मामले को लेकर राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग को पत्र भेजा गया है।
संगठन ने मांग की है कि ऐसे कर्मचारियों की जांच कराई जाए जो स्वयं काम नहीं कर रहे हैं और दूसरों से सफाई कार्य करा रहे हैं।
साथ ही दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग भी उठाई गई।
“सफाई कर्मचारियों से सिर्फ सफाई का काम लिया जाए”
संगठन ने यह भी मांग की कि सफाई कर्मचारियों को उनके मूल कार्य से अलग अन्य कामों में न लगाया जाए।
प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि कई जगहों पर सफाई कर्मचारियों से रसोइया, चौकीदार, माली और अन्य कार्य कराए जाते हैं, जो गलत है।
उन्होंने कहा कि सफाई कर्मचारियों के पद की गरिमा बनाए रखने और व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए यह जरूरी है कि उनसे केवल सफाई का ही कार्य लिया जाए।
कई पदाधिकारी रहे मौजूद
इस प्रेस वार्ता में संजीव वाल्मीकि, अनिल राव, राहुल मार्शल, अनिल एकलव्य, रामौतार राणा और अश्वनी सूद समेत कई पदाधिकारी और समाज के लोग मौजूद रहे।
संगठन ने चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आगे बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
