Moradabad के लालबाग स्थित प्राचीन काली माता मंदिर का विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। जूना अखाड़ा द्वारा महंत सज्जन गिरी और रामगिरी को हटाने की घोषणा के बाद मामला तेजी से तूल पकड़ गया। एक ओर अखाड़ा प्रतिनिधिमंडल इसे अनुशासनात्मक कार्रवाई बता रहा है, वहीं मौजूदा महंत इसे मंदिर पर कब्जे की कोशिश करार दे रहे हैं।

बताया गया कि जूना अखाड़ा का प्रतिनिधिमंडल मंदिर पहुंचा और व्यवस्थाओं तथा महंतों के आचरण को लेकर श्रद्धालुओं से जानकारी जुटाई। लंबे समय से मिल रही शिकायतों के आधार पर जांच की गई। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी से मुलाकात कर कार्रवाई की जानकारी दी।टाने की घोषणा से बढ़ा विवाद

जांच के बाद प्रतिनिधियों ने मीडिया से बातचीत में महंत सज्जन गिरी और रामगिरी को पद से हटाने की घोषणा की। साथ ही दो से तीन दिनों में नए महंत नियुक्त करने की बात कही गई। यह बयान सामने आते ही मंदिर परिसर और शहर में चर्चा तेज हो गई।
🗣️ महंतों ने लगाया कब्जे की कोशिश का आरोप
घोषणा के बाद महंत सज्जन गिरी ने प्रेस वार्ता कर आरोप लगाया कि जांच के नाम पर दबाव बनाया गया और मंदिर पर कब्जे की मंशा से यह कदम उठाया गया है। उन्होंने कहा कि मंदिर गुरु-शिष्य परंपरा से संचालित है और वह किसी बाहरी हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं करेंगे।
महंत रामगिरी ने भी बयान जारी कर कहा कि पद उत्तराधिकार गुरु-शिष्य परंपरा के अनुसार तय होता है। उन्होंने बताया कि इस मामले को लेकर न्यायालय में वाद दायर किया जा चुका है और किसी भी निर्णय के लिए कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
विवाद की सूचना मिलते ही प्रशासन सतर्क हो गया। मंदिर परिसर में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है और स्थिति पर नजर रखी जा रही है। फिलहाल मामला संवेदनशील बना हुआ है और दोनों पक्ष अपने-अपने दावे पर अड़े हुए हैं।
