नई दिल्ली/मस्कट। वैश्विक तेल आपूर्ति के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में एक बार फिर तेल टैंकर पर हमला होने की खबर सामने आई है। ब्रिटिश समुद्री सुरक्षा एजेंसी यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) के अनुसार, ओमान के लीमाह तट के पास एक तेल टैंकर को अज्ञात हथियार से निशाना बनाया गया, जिसके बाद जहाज में आग लग गई। सुरक्षा कारणों से चालक दल ने जहाज खाली कर लाइफबोट के जरिए सुरक्षित स्थान पर शरण ली।
UKMTO ने दी हमले की जानकारी
ब्रिटिश सैन्य एजेंसी UKMTO ने बताया कि टैंकर के सुरक्षा अधिकारी ने हमले की सूचना दी। खतरे को देखते हुए पूरे चालक दल को तत्काल जहाज से बाहर निकाल लिया गया। फिलहाल किसी के हताहत होने की पुष्टि नहीं हुई है, जबकि हमले के पीछे किसका हाथ है, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
IRGC का दावा- दो टैंकरों में विस्फोट
हमले के कुछ समय बाद ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया कि होर्मुज के दक्षिणी समुद्री मार्ग से गुजर रहे दो तेल टैंकरों में विस्फोट के बाद भीषण आग लग गई। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है।
पिछले कुछ दिनों में होर्मुज क्षेत्र में कई वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों की घटनाएं सामने आई हैं। रिपोर्टों के अनुसार, एक सप्ताह में तीन से अधिक कॉमर्शियल वेसल्स को निशाना बनाया गया है, जबकि पिछले 24 घंटों में दो अलग-अलग हमलों की खबरें आई हैं।
समुद्री सुरक्षा और तेल बाजार पर बढ़ी चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में लगातार हो रहे हमलों से वैश्विक समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ सकता है। दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल इसी समुद्री मार्ग से गुजरता है। ऐसे में यदि हमले जारी रहे तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आने की आशंका बढ़ सकती है।
ईरान-अमेरिका तनाव से बिगड़े हालात
रिपोर्टों के अनुसार, ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बाद क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति और अधिक गंभीर हो गई है। हाल के दिनों में दोनों देशों के बीच सैन्य गतिविधियां तेज हुई हैं, जिससे खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ी है। इसी कारण अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियां भी अतिरिक्त सुरक्षा उपाय अपनाने को मजबूर हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि तनाव जल्द कम नहीं हुआ तो इसका असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और तेल बाजार पर भी व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।
